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BRICS Summit Vegetarian Menu Controversy: हाल ही में नई दिल्ली के भारत मंडपम में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं और विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित हाई-प्रोफाइल गाला डिनर में परोसे गए विशुद्ध शाकाहारी (All-Veg) खाने को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच इस मुद्दे पर तीखा वैचारिक टकराव देखने को मिल रहा है।
BRICS Summit Vegetarian Menu Controversy-क्या है पूरा विवाद?
राजधानी दिल्ली में आयोजित इस वैश्विक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में दुनिया भर के बड़े राष्ट्राध्यक्ष और दिग्गज शामिल हुए थे। मेहमानों के स्वागत के लिए रखे गए विशेष रात्रिभोज (Gala Dinner) में पूरी तरह से शाकाहारी व्यंजन परोसे गए थे। इस पर कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार मेहमानों पर अपनी “Deeply Problematic” (गंभीर रूप से आपत्तिजनक) खानपान की प्राथमिकताएं थोप रही है।
कांग्रेस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों में विविधता का ध्यान रखा जाना चाहिए और इस तरह के फैसले वैचारिक एजेंडे के तहत लिए जा रहे हैं।
BRICS Summit Vegetarian Menu Controversy पर बीजेपी का पलटवार
BRICS Summit Vegetarian Menu Controversy : दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के इस रुख की कड़ी निंदा की है। सत्ताधारी दल का कहना है कि भारत की समृद्ध शाकाहारी संस्कृति और पारंपरिक खानपान का सम्मान पूरी दुनिया करती है। विदेशी मेहमानों ने भी भारतीय व्यंजनों और आतिथ्य की खुलकर तारीफ की है। बीजेपी नेताओं ने इसे देश की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जुड़ा गर्व का विषय बताया है, जिसे कांग्रेस अनावश्यक रूप से विवाद का रूप दे रही है।
वहीँ कांग्रेस के इन बयानों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने इसे विपक्ष की ओछी राजनीति करार दिया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुझे यकीन नहीं होता कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे जाने वाले खाने के मेनू पर भी राजनीति कर रही है। हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का आनंद लिया, जो अपने स्वाद और पोषक तत्वों की विविधता के लिए जाने जाते हैं।
सत्ता पक्ष का कहना है कि दुनिया भर में लोग अब शाकाहारी भोजन की तरफ रुख कर रहे हैं और विदेशी मेहमानों ने भी भारत के इस पारंपरिक आतिथ्य की खुलकर तारीफ की है। शिखर सम्मेलन की सफलता से बौखलाकर विपक्ष इस तरह के बेबुनियाद मुद्दों को तूल दे रहा है।
